@_wishieeeee_: एक कविता है! जब मैंने हज़ारोंकी भीड़में खुदको अकेला पाया कोई हाथ थामेंने तो क्या एक नज़र देखने भी नहीं आया , उस भीड़में मानो गुमसी होगईथी मैं । भीड़ उतनी थी, पर तुमको ढूंढनेकी आस मनहीमनमे ले चलरहीथी मैं । इत्ने चेहरे देखे, कईयोंकी हँसी सुनी ! नाजाने क्यों तुम्हारी ख़ुशबू ढूंढ रहीथी मैं। फिर एक शाम तुम आये उस झोके के साथ मुड़के देखा ,सुनी तुम्हारी आहट, मानो धड़कनों ने छोड़दिया हो साथ! एक पहल तुम्हें रोक पाऊं , तुम्हारी शीतलशि रू से मेरी मनकी आग बुझापाऊं, यही आस लेके हम मुड़े तुम्हारी तरफ सोचा सीनेसे लगाके पूछलु तुम्हे कि छोड़ गएथे तुम हमें क्युॅ ? अगर वापस आरहे थे तो तुमने करदी इतनी देर क्युॅ?, मनमें प्रश्न तो कही थे पर ये क्या , आएथे रातको नींद खुलतेही तुम होगएहो फिर गुम क्यों?
घाम 🪷☀️
Region: NP
Friday 26 June 2026 19:11:57 GMT
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Comments
Bilon Lawoti :
Beautiful Expressed 🥰🥰🥰
2026-06-26 19:38:33
1
Sristiii :
❤️❤️
2026-06-26 19:53:39
0
𝔃𝓾𝓷𝓷☽︎ :
☺️☺️
2026-06-27 01:04:22
0
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