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@oreidooraculobuba:
O Rei Do Oráculo Buba 👑
Open In TikTok:
Region: BR
Tuesday 18 August 2026 15:16:37 GMT
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952
75
13
Music
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20.1MB
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34.33MB
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52.52MB
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Comments
Carvalho :
oiBuba tudo bem nunca mais ti vi
2026-08-18 20:44:42
0
meGa dalva top :
sim maravilhoso amigo obrigado
2026-08-18 22:29:26
0
dalvaborges2 :
Gratidão
2026-08-19 01:24:36
0
Claudia Rodrigues Pereira :
🥰
2026-08-18 23:38:55
0
Elisete München :
gratidão
2026-08-18 21:41:08
0
Alice T. Loira :
vish
2026-08-18 23:01:07
0
nalvapereira557 :
Deus mim livre do passado.
2026-08-18 22:31:15
0
Andreia Santos :
[Adesivo] oooh glória
2026-08-18 23:23:22
0
Cassia :
encontrei alguém tão bom e ele não quis 😭
2026-08-18 23:35:28
0
Sônia porto :
gratidão universo
2026-08-18 20:12:46
0
Carlinhos Costa :
amém graças a Deus
2026-08-18 15:26:19
0
Simone Guedes Martins :
amém
2026-08-18 23:32:27
0
soniamariadepa438 :
amém eu creio
2026-08-18 21:53:28
0
nalvapereira557 :
Gostei da leitura, amei.
2026-08-18 22:30:53
0
Carvalho :
eu creio Buba
2026-08-18 20:45:12
0
Alice T. Loira :
ainda bem, que não é o imperador
2026-08-18 23:00:09
0
Maria Pereira :
gratidão universo
2026-08-19 00:21:04
0
Aline Ribeiro :
Gratidão universo 🙏
2026-08-18 23:19:07
0
Valéria antoniol :
realmente minha intuição sabe
2026-08-19 14:44:40
0
Sônia porto :
obrigada gratidão universo
2026-08-18 20:12:39
0
Maria Francisca :
gratidão universo
2026-08-18 19:59:53
0
janealmeida24_ :
amém eu creio
2026-08-18 19:48:05
0
Emi Oliveira 🦋 :
amém eu creio
2026-08-18 19:45:35
0
Maria Luiza Silva Brito :
ex eu tô fora não sinto nada por ex não e não quero tenho ondio dele
2026-08-18 19:13:53
0
#ÁguiaSilva# :
verdade
2026-08-18 15:37:08
0
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नमस्कार साथीहरू! महाभारतका सबैभन्दा दुःखद पात्रमध्ये एक हुन्—धृतराष्ट्र। उनी जन्मजात अन्धा थिए, र जीवनको अन्त्यतिर आफ्नै १०० पुत्रहरूको मृत्युको असह्य पीडा सहन बाध्य भए। तर के यो केवल संयोग थियो? वा यसको पछाडि पूर्वजन्मको कुनै रहस्य लुकेको थियो? हिन्दू धर्मशास्त्र र कर्मको सिद्धान्तले यसको गहिरो उत्तर दिन्छ। पूर्वजन्मको घोर पाप कथाअनुसार, धृतराष्ट्र आफ्नो पूर्वजन्ममा एक क्रूर राजा वा शिकारी थिए। एक दिन जंगलमा शिकार खेल्ने क्रममा उनले एउटा रुखमा गुँड बनाएर बसेका चराहरू देखे। गुँडभित्र १०० वटा साना अबोध चल्लाहरू थिए। निर्दयी बनेका उनले मनोरञ्जनका लागि गुँडमा आगो लगाइदिए। ती सबै १०० चल्लाहरू जलेर मरे। यति मात्र होइन, आफ्ना सन्तान बचाउन तड्पिएकी माउ चराको आँखा पनि उनले फुटाइदिए। त्यो पीडा, त्यो अन्याय र ती अबोध प्राणीहरूको मृत्युले अत्यन्त ठूलो पापको रूप लियो। माउ चराको आँसु र सन्तान वियोगको वेदनाले कर्मको एउटा गहिरो ऋण सिर्जना गरिदियो। कर्मको फल कसरी आयो? समय बित्यो। त्यस राजाको मृत्यु भयो र अर्को जन्ममा उनी धृतराष्ट्रका रूपमा जन्मिए। तब पूर्वजन्मको कर्मले फल दिन थाल्यो। पहिलो फल—माउ चराको आँखा फुटाएको पापका कारण धृतराष्ट्र जन्मजात अन्धा भए। दोस्रो फल—१०० वटा चल्ला जलाएर मारेको पापका कारण उनका आफ्नै १०० पुत्र—दुर्योधन, दुःशासन लगायत सबै कौरवहरू—महाभारत युद्धमा एक–एक गरेर मारिए। ५० जन्मपछि मात्र किन मिल्यो सजाय? यहाँ एउटा महत्वपूर्ण प्रश्न उठ्छ—यदि पाप त्यतिबेलै गरिएको थियो भने फल तुरुन्तै किन आएन? महाभारतको कथाअनुसार, कर्मको फल तुरुन्तै प्राप्त नहुन पनि सक्छ। धृतराष्ट्रसँग पूर्वजन्मका धेरै पुण्य कर्महरू बाँकी थिए। १०० पुत्र प्राप्त गर्न उनले लगातार ५० जन्मसम्म तपस्या र पुण्य सञ्चय गरेका थिए। जब ती पुण्यको प्रभावअनुसार उनले १०० पुत्र पाए, तब मात्र पुरानो सञ्चित पाप सक्रिय भयो। त्यसैले कर्म कहिल्यै नष्ट हुँदैन, उचित समय पर्खेर मात्र फल दिन्छ। श्रीकृष्णले सुनाएको सत्य महाभारत युद्धपछि सबै १०० पुत्र गुमाएर शोकमा डुबेका धृतराष्ट्रले भगवान् श्रीकृष्णसँग प्रश्न गरे, “हे प्रभु! मैले यो जन्ममा कसैको केही बिगारेको छैन। म किन जन्मजात अन्धो भएँ? मेरा १०० पुत्रहरू किन मारिए?” तब श्रीकृष्णले भन्नुभयो, “हे धृतराष्ट्र! कर्मको गति अत्यन्त गहन हुन्छ। ५० जन्मअघि तिमीले १०० चराका बच्चाहरूलाई जलाएर मारेका थियौ र माउ चराको आँखा फुटाएका थियौ। त्यही कर्मको फल आज तिमीले भोगिरहेका छौ। १०० पुत्र नपाएसम्म त्यो कर्मको फल पूरा हुन सक्दैनथ्यो, त्यसैले समय पर्खियो।” कथाको गहिरो सन्देश धृतराष्ट्रको कथा केवल एउटा पौराणिक घटना होइन, कर्मको अटल नियमको सशक्त उदाहरण हो। मानिसले जानेर वा नजानेर गरेको हरेक कर्मको हिसाब प्रकृतिले राखिरहेको हुन्छ। पुण्यले केही समयसम्म पापको फल रोक्न सक्छ, तर मेटाउन सक्दैन। त्यसैले अहंकार, क्रूरता र अन्यायको अन्त्य दुःखमै हुन्छ, जबकि दया, सत्य र धर्मले अन्ततः विजय प्राप्त गर्छ। यही कारणले धृतराष्ट्रले जन्मजात अन्धोपन र आफ्नै १०० पुत्रहरूको वियोगजस्तो असह्य पीडा भोग्नुपरेको थियो। कर्मको न्यायबाट न राजा उम्कन्छ, न शक्तिशाली, न साधारण मानिस।
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