खूबसूरत मेरी शायरी नहीं,
बल्कि तेरी मोहब्बत है..
जो नूर बनकर छलकती है मेरे अल्फाजों में…
तेरी मोहब्बत का हर रंग मेरी रूह में उतर गया..
तुझे सोचना, तुझे चाहना मेरी आदतों में बदल गया…
न कभी बदले ये लम्हा,
न बदले ये ख्वाहिश हमारी..
हम दोनों ऐसे ही रहें एक-दूजे के,
जैसे मैं चाहत और तुम जिन्दगी हमारी…
जब जन्नत ही तेरा आँचल है,
तो सुकून कहीं और क्यों ढूँढें..
तेरी बाँहों में मिलती है दुनिया सारी,
तो बहारें कहीं और क्यों ढूँढें…
जो मैं रूठ जाऊँ,
तो मुझे मना लेना..
कुछ न करना,
बस अपने गले लगा लेना…
दर्द की शाम हो या सुख का सवेरा हो..
सब कुछ स्वीकार है अगर साथ तेरा हो…
2026-09-07 09:57:32
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