@udhass04: #onthisday

Udass_zindagi🥀🍂
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Tuesday 13 October 2026 19:52:05 GMT
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shakeela.naseer78
Shakeela Naseer :
😳😳😳
2026-10-13 20:02:20
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binteashrafsabeen
Binte Ashraf :
🥺🥺🥺🥺🥺
2026-10-14 07:30:20
0
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॥ श्री हनुमान चालीसा ॥ दोहा श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥ चौपाई जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन॥ विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज सँवारे॥ लाय सजीवन लखन जियाए। श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥ तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना॥ जुग सहस्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥ दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना॥ आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥ भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥ नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥ चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥ अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥ राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ अंतकाल रघुवर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥ और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥ संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥ दोहा पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥#जयश्रीराम #जयबजरंगबली #हनुमानजी #रामराम #हनुमानभक्ति
॥ श्री हनुमान चालीसा ॥ दोहा श्रीगुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुरु सुधारि। बरनऊँ रघुबर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि॥ बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन-कुमार। बल बुधि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेस बिकार॥ चौपाई जय हनुमान ज्ञान गुन सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥ राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥ महाबीर बिक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा। कानन कुण्डल कुँचित केसा॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥ शंकर सुवन केसरी नंदन। तेज प्रताप महा जग वंदन॥ विद्यावान गुनी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा। बिकट रूप धरि लंक जरावा॥ भीम रूप धरि असुर संहारे। रामचंद्र के काज सँवारे॥ लाय सजीवन लखन जियाए। श्रीरघुबीर हरषि उर लाए॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥ सहस बदन तुम्हरो जस गावैं। अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥ जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते। कवि कोविद कहि सके कहाँ ते॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥ तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना। लंकेश्वर भए सब जग जाना॥ जुग सहस्र योजन पर भानू। लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥ दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥ सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना॥ आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हाँक तें काँपै॥ भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महाबीर जब नाम सुनावै॥ नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥ संकट तें हनुमान छुड़ावै। मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥ सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥ और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फल पावै॥ चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥ साधु संत के तुम रखवारे। असुर निकंदन राम दुलारे॥ अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥ राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥ तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥ अंतकाल रघुवर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥ और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेइ सर्व सुख करई॥ संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥ जय जय जय हनुमान गोसाईं। कृपा करहु गुरुदेव की नाईं॥ जो सत बार पाठ कर कोई। छूटहि बंदि महा सुख होई॥ जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ हृदय महँ डेरा॥ दोहा पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप। राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥#जयश्रीराम #जयबजरंगबली #हनुमानजी #रामराम #हनुमानभक्ति
تفسير المسير  قالت الأعراب -وهم البدو-: آمنا بالله ورسوله إيمانًا كاملًا، قل لهم -أيها النبي-: لا تدَّعوا لأنفسكم الإيمان الكامل، ولكن قولوا: أسلمنا، ولم يدخل بعدُ الإيمان في قلوبكم، وإن تطيعوا الله ورسوله لا ينقصكم من ثواب أعمالكم شيئًا. إن الله غفور لمن تاب مِن ذنوبه، رحيم به. وفي الآية زجر لمن يُظهر الإيمان، ومتابعة السنة، وأعماله تشهد بخلاف ذلك. إنما المؤمنون الذين صدَّقوا بالله وبرسوله وعملوا بشرعه، ثم لم يرتابوا في إيمانهم، وبذلوا نفائس أموالهم وأرواحهم في الجهاد في سبيل الله وطاعته ورضوانه، أولئك هم الصادقون في إيمانهم. قل -أيها النبي- لهؤلاء الأعراب: أتُخَبِّرون الله بدينكم وبما في ضمائركم، والله يعلم ما في السموات وما في الأرض؟ والله بكل شيء عليم، لا يخفى عليه ما في قلوبكم من الإيمان أو الكفر، والبر أو الفجور. يَمُنُّ هؤلاء الأعراب عليك -أيها النبي- بإسلامهم ومتابعتهم ونصرتهم لك، قل لهم: لا تَمُنُّوا عليَّ دخولكم في الإسلام؛ فإنَّ نفع ذلك إنما يعود عليكم، ولله المنة عليكم فيه أنْ وفقكم للإيمان به وبرسوله، إن كنتم صادقين في إيمانكم. إن الله يعلم غيب السموات والأرض، لا يخفى عليه شيء من ذلك، والله بصير بأعمالكم وسيجازيكم عليها، إن خيرًا فخير، وإن شرًّا فشر. #انس_العمادي#انس_العمادي #سورة_الحجرات #سورة_الحجرات #قران_كريم
تفسير المسير قالت الأعراب -وهم البدو-: آمنا بالله ورسوله إيمانًا كاملًا، قل لهم -أيها النبي-: لا تدَّعوا لأنفسكم الإيمان الكامل، ولكن قولوا: أسلمنا، ولم يدخل بعدُ الإيمان في قلوبكم، وإن تطيعوا الله ورسوله لا ينقصكم من ثواب أعمالكم شيئًا. إن الله غفور لمن تاب مِن ذنوبه، رحيم به. وفي الآية زجر لمن يُظهر الإيمان، ومتابعة السنة، وأعماله تشهد بخلاف ذلك. إنما المؤمنون الذين صدَّقوا بالله وبرسوله وعملوا بشرعه، ثم لم يرتابوا في إيمانهم، وبذلوا نفائس أموالهم وأرواحهم في الجهاد في سبيل الله وطاعته ورضوانه، أولئك هم الصادقون في إيمانهم. قل -أيها النبي- لهؤلاء الأعراب: أتُخَبِّرون الله بدينكم وبما في ضمائركم، والله يعلم ما في السموات وما في الأرض؟ والله بكل شيء عليم، لا يخفى عليه ما في قلوبكم من الإيمان أو الكفر، والبر أو الفجور. يَمُنُّ هؤلاء الأعراب عليك -أيها النبي- بإسلامهم ومتابعتهم ونصرتهم لك، قل لهم: لا تَمُنُّوا عليَّ دخولكم في الإسلام؛ فإنَّ نفع ذلك إنما يعود عليكم، ولله المنة عليكم فيه أنْ وفقكم للإيمان به وبرسوله، إن كنتم صادقين في إيمانكم. إن الله يعلم غيب السموات والأرض، لا يخفى عليه شيء من ذلك، والله بصير بأعمالكم وسيجازيكم عليها، إن خيرًا فخير، وإن شرًّا فشر. #انس_العمادي#انس_العمادي #سورة_الحجرات #سورة_الحجرات #قران_كريم

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